पुस्तक के विषय में
पिछले कई सालो से हमारी उत्कट अभिलाषा रही है कि राष्ट्रभाषा हिन्दी में श्री स्वामी शिवानन्द जी का प्रामाणिक विवेचनात्मक जीवन चरित्र अपने पाठको कि सेवा में प्रस्तुत करे | शिवानन्द विजय नमक नाटक के प्रकशित हो जाने पर श्री स्वामी जी के जीवन का प्रामाणिक विश्लेषणात्मक इतिहास उच्च साहित्य कि कला से अभिरंजित हो कर आवश्यक प्रतीत हुआ |
हमारे इस विचार कि कार्यानुरूपता का श्रेय सर्वतोमुख कलाकार श्री स्वामी सत्यानन्द जी को है जिनकी विद्वत्ता आंग्ल, हिन्दी तथा संस्कृत क्षेत्र में आदर्शवादिता का प्रतिनिधित्व करती काव्यमयी सरस भावनाओ के लोकप्रिय चित्रण में प्रचार प्रवीण की ओजस्वी शैली की रहस्यात्मकता है |
श्री स्वामी जी का वर्चस्वतेजोमय आध्यात्मिक जीवन विविध कलाओं का प्रसार करता हुआ, आंग्लभाषाविद सुप्रसिद्ध विवेचकों के इन्द्रधनुष का सप्तरंगी आकर्षण रहा है तथा अपनी एक एक कला की विशालता में किसी भी विवेचक के बौद्धिक प्रयास को नाना रूपों में स्थानान्तरित कर सकता है | अतः हमें पूर्ण विश्वास है की आंग्लभाषाभाषी हमारे पाठकगण यथावत इस अनुपम साहित्यनुरंजित कृति का हार्दिक स्वागत करेंगे |
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